कभी यूँ भी तो हो की बस कुछ शुरुआत की जाए ..
कभी यूँ भी तो हो की थोड़ी सी हवा छुई जाए ,
कभी यूँ भी तो हो की रेत को मुट्ठी में रोका जाए ...
कभी यूँ भी तो हो की कुछ किया तो जाए ,
न हवा हाथ में आयेगी ..न रेत मुट्ठी में ..
तो फिर कुछ ऐसा किया जाए ..
जो बस हो जाए ...
wah! bhabhi ji badi achhi shuruaat hai.
ReplyDeleteबढ़िया...
ReplyDeleteNice :)
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