Thursday, 28 April 2011

माँ बनी तो जाना माँ बनने का दर्द क्या होता है ,
बचपन बीता जिसके इर्द गिर्द 
कभी सोचा ही नहीं वो कैसे तड़पती है
वो हर पल मुझे दुनिया में जीने के लिए तैयार करती है 
और उस हर पल में खुद से ही अलग करती जाती है
मैं आगे कदम बढ़ती हूँ 
वो मुस्कुराती है
मेरी तो खुशी दुगनी हो जाती है
नहीं जाना वो पल पल कितनी अकेली होती जाती है
नहीं सोचा कभी की वो मेरे लिए मुझ से ज्यादा सोचती है
बस शिकायत थी की मुझे वो मेरी पसंद से रहने नहीं देती है
ये खा ..वो खा ..अब पढ़ .. ज़िन्दगी में आगे बढ़ 
रोना मत .. हिम्मत से काम लेना सीख ..
अँधेरे से मत डर ,अकेले होने से मत डर 
बस आगे बढ़..
याद है एक दिन पूछा था की वो इतना कैसे सोचती है
वो हंसी थी और बोली थी 
माँ बनेगी तब समझेगी
ठीक कहा था माँ ..मैं सब समझ गयी 
एक बात कहूँ माँ.. अब जाना की बिछड़ने का दर्द क्या होता है?
माँ का दिल कैसे हुक हुक करता है 
छोटी छोटी बातों पे आँखें कैसी भीगती हैं
और कैसे माँ उन्हें छुपा लेती है ..
अब एक बार फिर से बचपन जीने का मन करता है ..
एक बार फिर माँ के हाथों में सोने का मन होता है
इस बार बस माँ के कहे से जीने का मन करता है ..




2 comments:

  1. Insightfully emotional. nostalgically moving.
    - vipin

    ReplyDelete
  2. pragya, u made me cry............ apne ma aur bachpan ke din yaad kara diye, tu ne.- priya punjabi

    ReplyDelete